Gurugram Master Plan : 327 करोड़ का बजट और 4 जोन में सफाई व्यवस्था, जानें आपके वार्ड में क्या बदलेगा
यह योजना पिछले डेढ़ साल से फाइलों और तकनीकी संशोधनों में फंसी थी। इस दौरान टेंडर की शर्तों को पांच बार बदला गया। अब एजेंसियों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुबंध (Contract) की अवधि को 5 साल से बढ़ाकर 7 साल कर दिया गया है

Gurugram Master Plan : साइबर सिटी की सड़कों पर लगे कूड़े के ढेरों से मुक्ति दिलाने के लिए नगर निगम गुरुग्राम (MCG) ने एक ठोस रणनीति तैयार की है। शहर की सफाई व्यवस्था को पूरी तरह पटरी पर लाने के लिए 327 करोड़ रुपये का एक व्यापक मास्टर प्लान शहरी स्थानीय निकाय विभाग (ULB) को मंजूरी के लिए भेजा गया है। इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य पुराने ढर्रे को बदलकर एक पारदर्शी और जवाबदेह सिस्टम तैयार करना है।
विशेषकर ‘इको ग्रीन’ कंपनी के साथ हुए विवादों से सबक लेते हुए, निगम ने अब ‘एक शहर, एक एजेंसी’ के मॉडल को त्याग दिया है। नए प्लान के तहत पूरे गुरुग्राम को चार जोन में बांटा गया है। टेंडर की शर्तों में यह साफ कर दिया गया है कि एक एजेंसी को केवल एक ही जोन का काम मिलेगा। इससे न केवल प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि किसी एक कंपनी के काम न करने पर पूरे शहर की सफाई व्यवस्था ठप नहीं होगी।
शहर के अलग-अलग हिस्सों की भौगोलिक स्थिति और आबादी के आधार पर बजट का बंटवारा किया गया है।
जोन 1 (पुराना शहर): 78.1 करोड़

जोन 2 (सेक्टर और रिहायशी इलाके): 71.8 करोड़
जोन 3 (न्यू गुरुग्राम): 87.8 करोड़
जोन 4 (गोल्फ कोर्स रोड और सोहना रोड): 89.2 करोड़
नए मास्टर प्लान में केवल झाड़ू लगाना ही शामिल नहीं है, बल्कि कचरा प्रबंधन को हाई-टेक बनाया जा रहा है। कूड़ा उठाने वाली हर गाड़ी पर GPS लगा होगा, जिसकी मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से की जाएगी। सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति अब बायोमेट्रिक मशीन से लगेगी, ताकि कागजी नियुक्तियों के फर्जीवाड़े को रोका जा सके। घर-घर से गीला, सूखा और खतरनाक कचरा अलग-अलग उठाना अनिवार्य होगा।
यह योजना पिछले डेढ़ साल से फाइलों और तकनीकी संशोधनों में फंसी थी। इस दौरान टेंडर की शर्तों को पांच बार बदला गया। अब एजेंसियों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुबंध (Contract) की अवधि को 5 साल से बढ़ाकर 7 साल कर दिया गया है, ताकि कंपनियां आधुनिक मशीनों और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर सकें।
नगर निगम के कार्यकारी अभियंता सुंदर श्योराण ने बताया कि सरकार से मंजूरी मिलते ही ग्लोबल टेंडर जारी किए जाएंगे। उम्मीद है कि फरवरी के मध्य तक नई एजेंसियां जमीन पर काम करना शुरू कर देंगी।













